इतिहास के पन्नों से
आज का दिन : जब धोनी के कप्तानी में भारत ने जीता था 2011 विश्व कप
By CricShots - Apr 2, 2018 4:07 pm
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2 अप्रैल, 2011 का वो दिन जब इंडियन क्रिकेट टीम ने वो कारनामा कर दिखाय़ा था। जिसका इंतजार हिंदुस्तान के के क्रिकेट प्रेमी कई वर्षों से कर रहे थे। जी हां आज ही के दिन माही की अगुवाई में भारत ने 28 साल बाद विश्व कप जीता था। इससे पहले ये कारनामा 1983 में कपिल देव के कप्तानी में हुआ था। क्रिकेट प्रशंसक आज के दिन के बारे में जब भी सोचते ही उनकी जेहन में उमंग की लहर दौड़ने लगती है। आइए एक नजर डालते हैं और जानने की कोशिश करते है इस मैच के जीतने के लिए भारतीय टीम ने कितनी मेहनत की थी

जब भारत को शून्य पर पहला झटका लगा
पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका ने भारत के सामने 274 रन का लक्ष्य रखा था। जिसका पीछा करते हुए भारत ने अपना पहला विकेट वीरेंदर सहवाग के रूप में शून्य पर खो दिया। सहवाग का इस निर्णायक मैच में सस्ते में आउट होता देख स्टेडियम में मातम का महौल पसर गया। अभी एक जख्म से ये टीम उभर ही नहीं पाय़ी थी और 18 रन के स्कोर पर सचिन आउट हो गये ।
अब भारत का स्कोर 31-2 विकेट के नुकसान पर। ओपनिंग बल्लेबाजों के इसने कम रन पर आउट होने के वजह से पूरा दबाव गौतम गंभीर और विराट कोहली पर आ गयी थी। लेकिन दोनो बल्लेबाजों ने इस दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और लगातार टीम के खाते में रन जोड़ते चले गये। इस दौरान इन दोनो बल्लेबाजों ने टीम के स्कोर को 114 रन तक पहुंचाया । अब ऐसा लग रहा था ये टीम खतरे से बाहर हो चुकी है उसी समय डिलशान ने अपनी ही गेंद पर कोहली को कॅाट एंड बोल्ड कर एक बार श्रीलंका की इस मैच में वापसी करायी। कोहली के बाद तो युवराज सिंह को बल्लेबाजी करने आना था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और उनकी जगह महेंद्र सिंह धोनी क्रीज पर आ गए।

बल्लेबाजी पर जमे रहने के लिए धोनी हो गये थे मजबूर
रन बनाने के सारा दारोमदार अब महेंद्र सिंह धोनी और गौतम गंभीर के ऊपर था। लेकिन दोनो बल्लेबाजों ने इसे कभी दबाव समझा ही नहीं। और दोनो तरफ से रन की बौछार करना शुरू करने लगे। मानो ऐसा लग रहा था। की मुंबई के वांखड़े स्टेडियम में रनों की की सुनामी आ गयी है। दोनो बल्लेबाजों ने मिलकर भारत के स्कोर को 223 रन तक पहुंचा दिया। लेकिन तभी गौतम गंभीर 97 रन पर आउट हो गये।
हालांकि इस दौरान ये टीम खतरों से काफी दूर जा चुकी थे। लेकिन क्रिकेट तो अनिश्चत्तावों का खेल है। यहां बाजी तब तक खत्म नहीं होती जब तक विरोधी अपने घुटने ना टेक दें।

धोनी को मिला युवराज का साथ
अब भारत को जीतने के लिए 52 रन चाहिए थे। और सामने थे सिक्सर किंग युवराज और एम एस धोनी। जीत के इतने करीब देखकर युवराज थोड़ा धीरे खेल रहे थे। लेकिन धोनी कहा मानने वाले थे। वो तो हर गेंद को स्टेडियम के पार पहुंचा रहे थे। अब टीम का स्कोर था 270-4 । माही के सामने ये दुविधा थी। की चौका लगाए या छक्का ।

फिर क्या धोनी ने अपने दिल की सुनी और अपना पसंदीदा हेलीकॅाप्टर शॅाट लगाते हुए वो कारनामा कर दिया जो आज से पहले कपिल देव ने किया था। भारत ने 28 साल बाद विश्व कप ट्रॅाफी पर कब्जा किया। इस मैच में धोनी ने 76 गेंद पर 91 रन बनाए थे। लेकिन इस पूरे प्रतियोगिता में एक ऐसा खिलाड़ी था जो कैसर जैसे जानलेवा बीमारी से आंख मिचौली खेल रहा थाा। हम यहां युवराज सिंह की बात कर रहे हैं जो विश्व कप के दौरान इस बीमारी से ग्रसीत थे। लेकिन कौन खिलाड़ी इस स्टेज से वापस जाना चाहता था।